Facts About Amavasya Revealed
प्रतिमा या चित्र की स्थापना:- जिस देवता से संबंधित मंत्र का जप कर रहे हैं, उनकी प्रतिमा या चित्र अपने सामने रखें। जप आरंभ करने से पहले देवता की पूजा करें।
जप शुरु करने से पहले अपनी रक्षा अवश्य करें।
ऊँ ह्रीं श्रीं चामुण्डा सिंहवाहिनी बीसहस्ती भगवती रत्नमण्डित सोनन की माल ।
अपने गुरु एवं परमात्मा पर पूर्ण विश्वास और श्रद्धा रखें।
आदिनाथ कैलास निवासी, उदयनाथ काटे जम फांसी। सत्यनाथ सारणी संत भाखे, संतोषनाथ सदा संतन की राखे। कन्थडिऩाथ सदा सुख दायी, अचती अचम्भेनाथ सहायी।ज्ञान पारखी सिद्ध चौरंगी, मच्छेन्द्रनाथ दादा बहुरंगी।गोरखनाथ सकल घट व्यापी, काटे कलिमल तारे भव पीड़ा। नव नाथों के नाम सुमिरिये, तनिक भस्मि ले मस्तक धरिये। रोग शोक दारिद्र नशावे, निर्मल देह परम सुख पावे। भूत प्रेत भय भञ्जना, नव नाथों के नाम। सेवक सुमिरे चन्द्रनाथ, पूर्ण होय सब काम।
साधना में बताए गये अनुष्ठान के दिनों तक बिना आलस्य के प्रतिदिन जप अवश्य करें।
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मंत्र सिद्ध होने पर क्या होता है : मंत्र से किसी देवी या देवता को साधा जाता है, 4. Shabar Rog Nivaran मंत्र से किसी भूत या पिशाच को भी साधा जाता है और मंत्र से किसी यक्षिणी और यक्ष को भी साधा जाता है। मंत्र जब सिद्ध हो जाता है तो उक्त मंत्र को मात्र तीन बार पढ़ने पर संबंधित मंत्र से जुड़े देवी, देवता या अन्य कोई आपकी मदद के लिए उपस्थित हो जाते हैं।
हिंदू धर्म में वर्णित मंत्रों के इस्तेमाल के द्वारा एक सिद्ध तांत्रिक चाहे तो किसी भी व्यक्ति को गायब कर सकता है या फिर किसी भी व्यक्ति को अन्य रूप में परिवर्तित कर सकता है. इसके अलावा एक सिद्ध तांत्रिक मरी हुई आत्माओं से बात भी कर सकता है, हालांकि किसी भी प्रकार की सिद्धि को करने के लिए नियम और कुछ विधि बनी हुई होती है और जो साधक साधना को करने के लिए नियमों का पालन करता है उसकी ही सिद्धि होती है.
मृत्युंजय हवन, गणेश हवन, नवग्रह शांति... इत्यादि
साधना के दौरान ब्रह्मचर्य का पूर्ण पालन अवश्य करें।
ॐ मोसिद्धि गुरुपराय स्वीलिंग। महादेव की आज्ञा।
एते विज्ञानं अहिन न नगयो। मोहि करेत्साराकुठीतिलसकम सरुपद्रे।
परिहासे करे। नयन कटाक्षी करे। आपो न हाते। परहाते।